रील्स पर अधूरे गानों से दिल नहीं भरता? तो अल्ट्रा गाने का ‘देख के सुनो’ ऑफर इस बारिश में बदल देगा आपके संगीत का मज़ा

  • July 13, 2026
  • Ultra Team

सोशल मीडिया रील्स पर वायरल हो रहे पुराने बॉलीवुड गानों को अब दर्शक उनके असली वीडियो के साथ देख सकेंगे. ‘अल्ट्रा गाने’ प्लेटफॉर्म ने एक खास मॉनसून प्लेलिस्ट लॉन्च की है, जो नई पीढ़ी को रीमास्टर्ड वीडियो के जरिए सिनेमा के सुनहरे दौर का लाइव अनुभव कराएगी.

क्या आपके साथ भी ऐसा होता है कि इंस्टाग्राम स्क्रॉल करते हुए कोई पुराना रोमांटिक गाना आपके दिमाग में अटक जाता है? ‘भीगी-भीगी रातों में’ या ‘प्यार हुआ इकरार हुआ’ की धुनें रील्स पर सुनकर हम झूम तो उठते हैं, लेकिन 15 सेकंड का वह शॉर्ट वीडियो हमें उस गाने के असली जादू से दूर रखता है. इस बारिश के मौसम में आपकी इसी अधूरी ख्वाहिश को पूरा करने के लिए एक नया डिजिटल बदलाव आया है, जो आपके संगीत देखने और सुनने के नज़रिए को पूरी तरह बदलने वाला है.

सिर्फ सुनना क्यों, जब रील्स के वायरल गानों को देखने का मौका है

आज की युवा पीढ़ी सोशल मीडिया के जरिए पुराने दौर के गानों से जुड़ तो रही है, लेकिन वे इसके पीछे की शानदार सिनेमाई कलाकारी से अंजान हैं. इसी कमी को दूर करते हुए अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ने अपने ऑडियो-विजुअल प्लेटफॉर्म ‘अल्ट्रा गाने’ पर एक अनोखी पहल शुरू की है. इसके ‘देख के सुनो’ (Dekh Ke Sunno) कॉन्सेप्ट के तहत दर्शक अब गानों को सिर्फ हेडफोन पर सुनेंगे नहीं, बल्कि उनके ओरिजिनल और रीमास्टर्ड वीडियो का आनंद भी ले सकेंगे. आम लोगों के लिए इसका सीधा फायदा यह है कि अब उन्हें अपने पसंदीदा क्लासिक गानों के वीडियो ढूंढने के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ेगा.

बदल जाएगा आपके स्क्रीन टाइम का एक्सपीरिएंस

अल्ट्रा गाने प्लेटफॉर्म पर 1943 से लेकर 2024 तक के करीब 4,000 से ज्यादा हिंदी गानों का एक बहुत बड़ा कलेक्शन मौजूद है. कंपनी ने इस बारिस के मौसम को खास बनाने के लिए एक स्पेशल ‘मॉनसून क्लासिक्स प्लेलिस्ट’ तैयार की है. इसमें ‘सावन का महीना पवन करे शोर’, ‘बादल यूँ गरजता है’, ‘पानी रे पानी तेरा रंग कैसा’, ‘मेघा रे मेघा रे’, ‘हाए रे हाए’, ‘हाय-हाय ये मजबूरी’ और ‘रामा-रामा गजब हुई गवा रे’ जैसे एवरग्रीन गानों को शामिल किया गया है. यह सिर्फ एक प्लेलिस्ट नहीं है, बल्कि उस दौर के सुपरस्टार्स की अदाकारी और बेहतरीन लोकेशंस को हाई-क्वालिटी में दोबारा जीने का एक जरिया है.

डिजिटल दौर में खोती अनमोल विरासत को बचाने की कोशिश

अल्ट्रा मीडिया एंड एंटरटेनमेंट ग्रुप के फाउंडर और सीईओ सुशीलकुमार अग्रवाल का मानना है कि सोशल मीडिया ने आज पुराने गानों को नई पीढ़ी के बीच दोबारा पॉपुलर तो बना दिया है, लेकिन लोग अक्सर गानों के सिर्फ हुक लाइन को ही जानते हैं. इस प्लेटफॉर्म का मकसद युवाओं को उन गानों के ओरिजिनल फिल्मी दृश्यों से रूबरू कराना है.

वहीं, ग्रुप के सीओओ और डायरेक्टर रजत अग्रवाल का कहना है कि भारतीय फिल्म संगीत हमारी सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहर है. रील्स पर वायरल होने वाला हर गाना युवाओं को उस दौर की फिल्मों और कलाकारों से जोड़ सकता है. यह प्लेटफॉर्म ऑडियो और वीडियो को एक साथ लाकर लोगों को एक मुकम्मल और असली एहसास देने का काम कर रहा है.

पुराने दिग्गजों के साथ नए टैलेंट को भी बड़ा मंच

यह प्लेटफॉर्म सिर्फ मोहम्मद रफी, लता मंगेशकर और किशोर कुमार जैसे महान गायकों की विरासत को सहेजने तक ही सीमित नहीं है. बल्कि, इसके ‘अल्ट्रा म्यूज़िक ओरिजिनल्स’ के जरिए नए और इंडिपेंडेंट कलाकारों को भी अपनी प्रतिभा दिखाने का पूरा मौका मिल रहा है. इसका सीधा मतलब यह है कि जहां एक तरफ घर के बड़े बुजुर्ग पुराने गानों की यादों में खो सकते हैं, वहीं युवा पीढ़ी नए और पुराने संगीत के एक बेहतरीन फ्यूजन का लुत्फ उठा सकती है. इस मॉनसून में यह डिजिटल बदलाव हर वर्ग के संगीत प्रेमियों के लिए एक तोहफे जैसा है.